भूमि अधिग्रहण कानून के साथ खिलवाड़।

प्रोफेसर हनुमाना राम ईसराण(पूर्व प्राचार्य, कॉलेज शिक्षा, राजस्थान) किसान के लिए जमीन लाइफ लाइन रही है। पीढ़ियों के खून-पसीने से उसने खेत-खलिहान पर हक हासिल किया है। जानलेवा थपेड़े सहने के बावज़ूद किसान के स्वाभिमान को क़ायम रखने में उसकी जमीन ने अहम भूमिका निभाई है। किसान को उत्पादनकर्ता की बजाय चाकर-दास की श्रेणी में धकेलने की एक सुविचारित साजिश अब परवान पर है। कैसे? यह समझने के लिए इस आलेख को गौर से पढ़िए। कॉरपोरेट घरानों की गोदी सरकार अपने आकाओं अर्थात उद्योगपतियों का वरद हस्त प्राप्त करने में…

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कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन अध्यादेश और उनका किसानों पर प्रभाव ।

  प्रोफेसर हनुमानाराम ईसराण (पूर्व प्राचार्य ,कॉलेज शिक्षा राजस्थान) केंद्र सरकार ने 5 जून, 2020 को एक पुराने कानून (आवश्यक वस्तु अधिनियम EC Act 1955) में संशोधन सहित दो नए कानूनों “द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स प्रमोशन एंड फेसिलिएशन FPTC 2020)” और “फार्मर एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्युरेंस एंड फार्म सर्विसेज आर्डिनेंस FAPAFS 2020)” को अध्यादेश के जरिए लागू किया है। किसानों को गुमराह करने के लिए कहा गया कि इससे किसानों को उनकी उपज के सही दाम मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी। यह सिर्फ…

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मिथ्या गर्व के वशीभूत जमीनी मुद्दों को भूलते जा रहे हैं हम । Vikash Anand

विकाश आनंद अपने ही ज़मीन पर बंधुआ मज़दूर होना और तिस पर अपने हिन्दू होने का गर्व, कभी हिंदी बोलने वाले होने पर गर्व तो कभी कुछ और होने में गर्व। डायरेक्ट ब्रिटिश राज और परोक्ष ब्रिटिश शासन में अंतर यह आया है कि पहले लोग अपने हित-अनहित को जान समझ रहे थे और उसी अनुरूप प्रतिक्रिया कर रहे थे। लेकिन आज़ाद भारत की ग़ुलाम सरकारों ने अपने बुद्धिजीवियों को जनता के बुद्धिजीवियों के रूप में जिस तरह से इंजेक्ट किया है, वह प्राणघातक बन गया है। इसकी पहली और…

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प्रशांत भूषण केस और कोलेजियम सिस्टम पर उठी पहली बुलंद आवाज उपेंद्र कुशवाहा।

मौर्यवंशी शशिकांत मेहता आज सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक फैसला आया । ऐतिहासिक फैसला इस मायने में और भी हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की आलोचना करने पर सुप्रीम कोर्ट जजेज जाने-माने वकील प्रशांत भूषण को अवमानना करने के जुर्म में एक कठोर फैसला सुना कर आम जनता में यह संदेश देने की कोशिश में थे । उद्देश्य था लोकतंत्र में कोलेजियम सिस्टम से चुने गए जजेज द्वारा एक नागरिक के तौर पर जनता के दिए गए आलोचना के अधिकार पर एक तरह से खत्म करना…

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रामस्वरूप वर्मा : एक नेता जिसके लिए अपने सिद्धांत ही सब कुछ थे।

विकाश आंनद हमें किस्सों में किसी काल्पनिक चाणक्य की कहानी सुनाई जाती है कि वह सरकारी काम और अपने निजी काम के लिए अलग-अलग आवास और दिया रखते थे। पर उत्तर प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और मानवतावादी दार्शनिक रामस्वरूप वर्मा जी वास्तव में वित्त मंत्री रहते हुए भी अपने काम से कहीं भी आने-जाने के लिए रिक्शा या टैम्पू या रेलगाड़ी का ही प्रयोग करते थे। आज उनकी जयंती है। भाग्य-भगवान, अन्धविश्वास, ढोंग-पोंग-पाखंड, पुनर्जन्म, पूर्वजन्म, जात-विवाद, चमत्कार, बाबा-बूबी, मठ-मंदिर, चिलम-चिमटा, जैसी व्यर्थ की कुरीतियों और परम्पराओं के ख़िलाफ़ ऐसी…

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हर परिवार चुने अपना फैमिली फार्मर ।- अनुज राज पाठक

अनुज राज पाठक। आज चहुँ ओर एक हाहाकार है। रोटी चर्चा के केंद्र में आ गई है। मज़दूरों के दर्द पर टीवी चैनल चीख रहे हैं। हमें थोड़ा-सा सोचना चाहिए कि हम कितने बरस बाद रोटी और मज़दूरों पर बात कर रहे हैं। असल में व्यक्ति तब तक वास्तविक दर्द महसूस नहीं कर सकता, जब तक वह ख़ुद उस दर्द में न हो या उसका कोई आत्मीय जन दर्द में न हो।हम चीख सकते हैं। किसानों की दुर्दशा पर चिल्ला सकते हैं। लेकिन यह चीखना-चिल्लाना बड़ा ही नाटकीय होता है।…

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जींद हरयाणा के लेखक-डायरेक्टर संजय सैनी ने बनाई कोरोना वारियर्स पर शॉर्ट फिल्म।

कर्मपाल पूनिया जिला जींद हरियाणा के लेखक और डारेक्टर संजय सैनी ने अपने साथियों मनजीत गौतम, बलजीत पुनिया और कुलदीप बिरोली के साथ बिना ज्यादा संसाधनों के किसानों की कोरोना महामारी को दर्शाती शॉर्ट फिल्म बनाकर जिला प्रशासन को दी है । जिसमें जिले के हर अधिकारी से लेकर कर्मचारी को कोरोना वारियर्स बताया गया है ।फिल्म दो जून शाम आठ बजे जनमत हरियाणा के यूट्यूब चैनल पर रिलीज की गई ,फिल्म का विमोचन जिला जींद के अस्पताल के मुख्य चिकित्सक श्री जयभगवान जाटान जी ने किया ।फ़िल्म की शुरुआत…

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वर्ण व्यवस्था प्राचीन नही आधुनिक है।

        डॉ.मुकेश मीणा आंशिक रूप से इंडिया में वर्ण विभाजन हुआ ,लेकिन प्राचीन काल में नही आधुनिक काल में अन्ग्रेजो के द्वारा । इसके क्या कारण थे इसे समझते हैं ।अंग्रेजो का लेबर मैनेजमेंट बहुत अच्छा था उसमें आधुनिक सिद्धान्तों का समावेश था जो उनसे पहले इंडिया में कही भी नही दिखाई देता । अग्रेजो की प्रशासनिक प्रणाली पूर्णतया औपचारिक नियमो पर आधारित थी । अंग्रेजों ने अपने कर्मचारियों के लिए ऐसे नियम बना रखे थे कि वे स्थानीय लोगो से घुल मिल ना सकें, जिससे उनके…

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इतिहास के दुकानदार और किसान इतिहास

   विकाश आनन्द। इतिहास के दुकानदारों की दुकानदारी देखिये कि कितना जतन करके किसानों के इतिहास को चर्चा से ही गायब कर दिया गया है। जिस मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को तराइन के दूसरे युद्ध में पराजित किया, मार्च 1205 में उसी गौरी का सर खोखर जाटों ने रामलाल खोखर के नेतृत्व में काट दिया था। इसके बावजूद इतिहास की दुकान से उनका नाम गायब है। सोमनाथ मंदिर लूटकर जा रहे महमूद गजनवी को नागौर में खोखरों ने लूट लिया। लेकिन इतिहास लिखने वालों ने इसे भी दर्ज़ करने…

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UNDERSTANDING MARX- PART III RICHARD D WOLFF के यूट्युब वीडियो का हिंदी अनुवाद

मैं आपको समझाने की कोशिश करता हूँ कि किसी भी आबादी (चाहे वो छोटा सा गांव हो, शहर हो स्टेट हो या देश हो) के लिये मार्क्सवादी नजरिया कैसे काम करता है। वो क्या बात है जो मार्क्स बताना चाहता था। हम वो देखने की कोशिश करते हैं जो बाकी सब देखने में नाकाम रहते हैं। इंसानो का हर समुदाय, समाज, कम्युनिटी एक व्यवस्था के तहत काम करता है। ये सम्भव है कि लोगों को उस व्यवस्था के बारे मे न पता हो पर वो सब व्यवस्था के अधीन ही…

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