
कर्मपाल पूनिया
जिला जींद हरियाणा के लेखक और डारेक्टर संजय सैनी ने अपने साथियों मनजीत गौतम, बलजीत पुनिया और कुलदीप बिरोली के साथ बिना ज्यादा संसाधनों के किसानों की कोरोना महामारी को दर्शाती शॉर्ट फिल्म बनाकर जिला प्रशासन को दी है ।
जिसमें जिले के हर अधिकारी से लेकर कर्मचारी को कोरोना वारियर्स बताया गया है ।
फिल्म दो जून शाम आठ बजे जनमत हरियाणा के यूट्यूब चैनल पर रिलीज की गई ,
फिल्म का विमोचन जिला जींद के अस्पताल के मुख्य चिकित्सक श्री जयभगवान जाटान जी ने किया ।
फ़िल्म की शुरुआत होती है एक पशुपालक किसान के प्रवेश से जो एक व्यवसायी के यहां दूध डिलीवर करने जाता है। व्यवसायी लोकडाउन के चलते व्यवसाय के ठप हो जाने के चलते टेंशन दूर करने के लिए शराब की बोतल खोले बैठा है, और किसान के पूछने पर अपने व्यवसाय में हुए घाटे का दुःखी मन से उसके सामने जिक्र करता है। यहाँ लेखक और डायरेक्टर ने बड़े ही बेहतरीन तरीके से किसान के माध्यम से ऐसे व्यवसायियों जिनका व्यापार कोरोना के कारण किये गए लोकडाउन के चलते तबाह हो गया है उन्हें मेहनत करके फिर आगे बढ़ने के संदेश के साथ -साथ टेंशन दूर करने के लिए पी जाने वाली शराब के दुष्प्रभावों के प्रति भी चेताया है, और संदेश दिया है कि ” एक कदम पीछे हटना नुकसान नहीं “।
दूसरे दृश्य में वही किसान जब दूध डिलीवर करके लौटता है तो उसकी रास्ते में एक डॉक्टर से मुलाकात और उस मुलाकात के माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंग का संदेश और कोरोनाकाल में दिन रात मेहनत कर रहे डॉक्टरों की कर्तव्यनिष्ठता को उजागर किया है।
” अपनो के लिए अपनों से दूर हो जाना थोड़े समय के लिए गलत तो नहीं।”
एक अन्य दृश्य में एक अध्यापक और उसी किसान के वार्तालाप के माध्यम से इस समय अध्यापकों के रोल और उनके सामने आने वाली समस्याओं को भी रेखांकित किया है ।इसी तरह के एक अन्य दृश्य में उसी किसान के एक पुलिस के सिपाही से वार्तालाप को दिखाया है इस वार्तालाप में पुलिस का सिपाही किसान को लोकडाउन के दौरान भी बिना किसी तनख्वाह के फसल उत्पादन के कार्य मे लगे रहने,फसल बेचने और घूमघूमकर सबके लिए दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करने के कारण सबसे बड़ा कोरोना वारियर बताते हुए कहता है “दूध का कारोबार तू कर रह्या फसल बेचण लाग रह्या..थारे सहारै यो देस चाल रह्या ..योद्धा तो असली थाम हो,और जुणसा काम यो थाम कर रह्ये हो न नाज पैदा करके यो काम कोए बिजनेस मैन नहीं कर सकता और कोए मास्टर नहीं कर सकता…
ताऊ…! सेल्यूट है तनै…
लेखक और निर्देशक ने इस शॉर्ट फिल्म के माध्यम से एक साथ अनेक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है..मेरा मानना है कि किसानों के पढ़े लिखे बेटे इसी तरह आगे आकर किसानी और किसानों के महत्व और उनके सामने आने वाली समस्याओं को रेखांकित करने वाली शॉर्ट फिल्म्स बनाकर लेख आदि लिखकर जागरूक करें तो वो दिन दूर नहीं जब एक किसान अपने किसान होने पर गर्व करेगा..
साथ ही मेरा ये भी मानना है कि किसान को अन्नदाता वाले टैग से खुद को आजाद करना होगा और भावुकता के बजाय व्यावहारिकता को अपने जीवन मे अपनाना होगा।
मैं संजू सैनी और उनकी टीम के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ -साथ ये भी चाहता हूँ कि वो इसी तरह अपनी शॉर्ट फिल्म्स के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश देते रहें ।लेखक- निर्देशक और उनकी पूरी टीम के किसान बैकग्राउंड के होने के कारण मुझे उनसे अपेक्षा है कि उनकी शार्ट फिल्म्स के केंद्रिय विषय समाजिक कुरूतियों नकारात्मकता पर प्रहार के साथ -साथ आदिवासी ,किसान और कारीगर और कामगार वर्ग की समस्याएं भी हों..
