
Dhananjay Singh Rajpoot
पहले परंपरागत घरेलू उधोगो को बर्बाद किया गया। उसकी जगह बड़े बड़े कारखाने लगाने वालों को प्रोत्साहित किया गया सस्ते ज़मीन और बिजली दिया गया सस्ता कर्ज और भयंकर सब्सिडी दी गई ये कहकर की सबको रोजगार मिलेगा हुआ उल्टा जो उत्पादन घरों में हो रहा था अब वही उत्पादन बड़े बड़े कारखानों में होने लगा। करोड़ो रूपये के घोटाले होने लगे सब्सिडी खाने होड़ मच गई। जो परम्परागत घरेलू उत्पादन करने वाले थे वो बेरोजगार हो गए। जो उत्पादन करोड़ो लोग मिलकर घरों में करते थे। उससे ज्यादा उत्पादन लाखों लोग बड़ी बड़ी मशीनो के द्वारा बड़े बड़े कारखानो में करने लगे। अब क्योंकि यहाँ श्रम कम लग रहा था। इसलिए उत्पादन की लागत घट गई। कारखानो के उत्पाद सस्ते और घरों में बने उत्पाद महँगे हो गए। जिसके कारण घर के बने उत्पाद बिकने बन्द हो गए। जैसे हाथ के बने कपडे का कारोबार लगभग बन्द होने कगार पर है। करोड़ो बुनकर अब निराश हताश हो चुके है। अब इनको बचाने के नाम पर सरकार सिर्फ ड्रामा कर रही है। वैसे इनको बर्बाद करने वाली सरकार ही है। इसी तरह चीनी बनाने के बड़े बड़े कारखाने सरकार ने लगाये। जो गन्ने से गुड़,खांड शक्कर ,राब, सिरका गाँव मे बनता था। उसपे रोक तक लगा दी। जहाँ पर चीनी मिल मौजूद थी सरकार का मानना था अगर ये गन्ना कोल्हू के पास जायेगा तो मील को पूरा गन्ना नही मिल पाएगा। इससे चीनी मील का घाटा हो जायेगा। कोल्हू चलाने के काम मे करोड़ो लोग लगे थे उसकी जगह कारखानो में लाखो लोगो ने गन्ने से पेराई करके बड़े बड़े मशीनो के माध्यम से चीनी बना दिया। साफ करने के लिये बढ़िया वाले केमिकल का प्रयोग किया। बाद में पता चला चीनी स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। अब कुछ कंपनी सल्फर लेस चीनी बेच रही है। अधिकतर कोल्हू बन्द हो गए। लेकिन जो बना रहे थे इस परिवर्तन काल मे उनके गुड़ की कीमत चीनी से ज्यादा है। दुनिया सुगर की बीमारी को देख रही है। इसलिए अधिकतर लोग अब गुड़ की तरफ आकर्षित हो रहे है। पूरी दुनिया मे गुड़ की डिमांड बढ़ रही है। अब फिर से कोल्हू लगाने का दौर शुरू हो रहा है। जो स्वाद गुड़ , सिरका, राब, खांड, शक्कर में है वो चीनी में कभी नही मिल सकता। चीनी के नाम पर सबसे अधिक घोटले भारत मे हुए है। चीनी मिल और कपड़े के कारखानों ने जबरदस्त प्रदूषण फैला रख्खा है। लेकिन इसको बन्द करने की कोई बात नही करता। जबतक ये बड़े बड़े कारखाने बन्द नही होंगे। तबतक इसी तरह का प्रदूषण और भ्रष्टाचार बढ़ता रहेगा और इसी तरह बीमारी बढ़ती रहेगी। ये दो उदाहरण सिर्फ आपको को बताने के लिये है। लेकिन इन्होने गाँव मे उत्पादन के हर सेक्टर को बर्बाद कर दिया। अब सारा कच्चा माल कारखानो में जाता है फिर कारखानो से गाँव मे आता है। पहले जो उत्पादन करने वाला था कच्चा माल प्रोसेस करके सबका पेट भरने वाला था अब वो उपभोक्ता बन गया है। साथ ही साथ बेरोजगार या किसी कंपनी का गुलाम बना गया। मशीनीकरण और केमिकल के दम पर हर उत्पाद को जहरीला बना दिया गया। जिसके कारण पूरा वातावरण जहरीला हो गया है।
