संजीव कुमार सांगवान अगर किसान एक लाइन में अपने सवाल का उत्तर पूछे तो देश के 99% नेताओ के पास उसका उत्तर नही है।वह लाइन है कि जिस प्रकार पक्ष और विपक्ष मिलकर अपनी तनख्वाहें और भत्ते सांसद मे बैठकर बिना बहस के चुपचाप बढ़ा लेते हैैं “ठीक उसी प्रकार किसान के साथ पक्ष और विपक्ष मिलकर उसकी मेहनत और खुन पसीने से उगाई गई फसल पर लागत से आपकी तनख्वाह और भत्ते वृद्धि जितना प्रतिशत बढ़ाकर खरीदने का आश्वासन दे सकते हो ?” आपका जनप्रिय और लाडला,किसान पुत्र,फलाणा,धकाणा…
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बिना मुवावजा दिए जबरदस्ती खेतों में पोल लगाने का मामला फिर से चर्चा में।
भिवानी, 01 अप्रैल : बिना मुवावजा दिए और जबरदस्ती किसानोंं के खेेेतोंं मेें पॉवर ग्रिड के बड़े-बड़े पोल लगाने के मामला एक बार फिर से चर्चा में है। इसी मामले में रविवार 4 अप्रैल को सुबह 10 बजे गांव निमड़ीवाली के पंचायत घर में जिला स्तरीय किसान पंचायत का आयोजन किया जाएगा। इस मामले में किसानों का आरोप है कि बिना मुआवजा दिए आधे-आधे एकड़ में पोल लगाए जा रहे हैं, किसान यदि पोल लगाने के लिए मना करते है तो ग्रिड कर्मचारी पुलिस से किसानों की पिटाई करवाते हैं।…
Read Moreकिसान आंदोलन स्थल नहीं किसान तीर्थ है।
दिल्ली और बहादुरगढ़ के बीच स्थित टीकरी बॉर्डर जो हरयाणा और दिल्ली को अलग करता है पर स्थित किसान धरनास्थल पर जाना हुुुआ। किसान आंदोलन के चलते आज के दिन टीकरी बॉर्डर किसान तीर्थ का रूप ले चुका है। मेट्रो से उतरते ही सबसे पहले दिल्ली पुलिस ,BSF और वज्र वाहनों के साथ RAF के जवान दिखाई दिए, और उन्होंने रोकते हुए गलियों से घूमकर आंदोलन स्थल पर जाने को कहा। जब मैं आगे आंदोलन स्थल पर गया वहां युवा वालंटियर किसानों की सहायता के लिए कैम्प लगाए दिखे।…
Read Moreकृषिक्षेत्र में कॉरपोरेट की घुसपैठ । Pro. H.R.ISRAN
किसान संगठनों एवं कुछ विपक्षी दलों के तमाम विरोध को अनसुना और दरकिनार करते हुए सरकार ने इन बिलों को बिना किसी संशोधन के संसद से पारित करवा लिया है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही ये कानून बनने वाले हैं। 13 सितम्बर को एक आलेख पोस्ट किया था, जिसमेंकृषि सुधार से जुड़े इन अध्यादेशों से किसानों के लिए क्या खतरे उत्पन्न होने वाले हैं, इनको उजागर किया था। उसी की निरंतरता में पुनः स्पष्ट कर रहा हूँ कि ये तीनों बिल पूरी तरह बड़े व्यापारियों और कंपनियों के…
Read Moreकृषि अध्यादेशों से आगे क्या ? Mahak Singh Tarar
महक सिंह तरार सरकार खेती सुधार के लिए जो 3 अध्यादेश लायी थी वो अब कानूनी जामा पहनकर किसानों की नियति निर्धारित करने को अग्रसर हैं। पिछले दशक मे MSP को बढ़ाने के लिए आंदोलन होते थे आज नौबत ये है कि बस MSP बच जाए। किसान हितैषी थिंक टैंक Ramandeep Singh Mann , सरदार V M सिंह, देवेंदर शर्मा इत्यादि एक साल पहले किसानों को 18000 हजार रुपये महीने की मिनिमम गारन्टिड इनकम पर विमर्श चला रहे थे। पर आज सरकारी दांव के सामने कोशिश कर रहे हैं…
Read Moreभूमि अधिग्रहण कानून के साथ खिलवाड़।
प्रोफेसर हनुमाना राम ईसराण(पूर्व प्राचार्य, कॉलेज शिक्षा, राजस्थान) किसान के लिए जमीन लाइफ लाइन रही है। पीढ़ियों के खून-पसीने से उसने खेत-खलिहान पर हक हासिल किया है। जानलेवा थपेड़े सहने के बावज़ूद किसान के स्वाभिमान को क़ायम रखने में उसकी जमीन ने अहम भूमिका निभाई है। किसान को उत्पादनकर्ता की बजाय चाकर-दास की श्रेणी में धकेलने की एक सुविचारित साजिश अब परवान पर है। कैसे? यह समझने के लिए इस आलेख को गौर से पढ़िए। कॉरपोरेट घरानों की गोदी सरकार अपने आकाओं अर्थात उद्योगपतियों का वरद हस्त प्राप्त करने में…
Read Moreकृषि क्षेत्र से जुड़े तीन अध्यादेश और उनका किसानों पर प्रभाव ।
प्रोफेसर हनुमानाराम ईसराण (पूर्व प्राचार्य ,कॉलेज शिक्षा राजस्थान) केंद्र सरकार ने 5 जून, 2020 को एक पुराने कानून (आवश्यक वस्तु अधिनियम EC Act 1955) में संशोधन सहित दो नए कानूनों “द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स प्रमोशन एंड फेसिलिएशन FPTC 2020)” और “फार्मर एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्युरेंस एंड फार्म सर्विसेज आर्डिनेंस FAPAFS 2020)” को अध्यादेश के जरिए लागू किया है। किसानों को गुमराह करने के लिए कहा गया कि इससे किसानों को उनकी उपज के सही दाम मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी। यह सिर्फ…
Read Moreकिसान नहीं पूंजीपति हितैषी है कृषि अध्यादेश – Hawasingh Sangwan
पूर्व कमाडेंट हवासिंह सांगवानमो.न० 94160 56145 हाल ही में सरकार तीन नए कृषि अध्यादेश लेकर आई है । इनमें जो सबसे पहली अहम् बात है वह यह है कि पहले हर व्यापारी केवल मंडी से ही फसल खरीद सकता था परन्तु अब व्यापारी को इन नए अध्यादेश के तहत मंडी के बाहर से फसल खरीदने की छूट दी गई है । कहने का अर्थ है कि सर छोटूराम ने किसान के हित के लिए सन 1938 में “ पंजाब कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम -1938” बनाया था उसे यह सरकार एक…
Read Moreहर परिवार चुने अपना फैमिली फार्मर ।- अनुज राज पाठक
अनुज राज पाठक। आज चहुँ ओर एक हाहाकार है। रोटी चर्चा के केंद्र में आ गई है। मज़दूरों के दर्द पर टीवी चैनल चीख रहे हैं। हमें थोड़ा-सा सोचना चाहिए कि हम कितने बरस बाद रोटी और मज़दूरों पर बात कर रहे हैं। असल में व्यक्ति तब तक वास्तविक दर्द महसूस नहीं कर सकता, जब तक वह ख़ुद उस दर्द में न हो या उसका कोई आत्मीय जन दर्द में न हो।हम चीख सकते हैं। किसानों की दुर्दशा पर चिल्ला सकते हैं। लेकिन यह चीखना-चिल्लाना बड़ा ही नाटकीय होता है।…
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