बिना मुवावजा दिए जबरदस्ती खेतों में पोल लगाने का मामला फिर से चर्चा में।

भिवानी, 01 अप्रैल : बिना मुवावजा दिए और जबरदस्ती किसानोंं के खेेेतोंं मेें  पॉवर ग्रिड के बड़े-बड़े पोल लगाने के मामला एक बार फिर से चर्चा में है। इसी मामले में रविवार 4 अप्रैल को सुबह 10 बजे गांव निमड़ीवाली के पंचायत घर में जिला स्तरीय किसान पंचायत का आयोजन किया जाएगा। इस मामले में किसानों का आरोप है कि बिना मुआवजा दिए आधे-आधे एकड़ में पोल लगाए जा रहे हैं, किसान यदि पोल लगाने के लिए मना करते है तो ग्रिड कर्मचारी पुलिस से किसानों की पिटाई करवाते हैं।…

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किसान आंदोलन स्थल नहीं किसान तीर्थ है।

  दिल्ली और बहादुरगढ़ के बीच स्थित टीकरी बॉर्डर  जो हरयाणा और दिल्ली को अलग करता है पर स्थित किसान धरनास्थल पर जाना हुुुआ। किसान आंदोलन के चलते आज के दिन टीकरी बॉर्डर किसान तीर्थ का रूप ले चुका है। मेट्रो से उतरते ही सबसे पहले दिल्ली पुलिस ,BSF और वज्र वाहनों के साथ RAF के जवान दिखाई दिए, और उन्होंने रोकते हुए गलियों से घूमकर आंदोलन स्थल पर जाने को कहा। जब मैं आगे आंदोलन स्थल पर गया वहां युवा वालंटियर किसानों की सहायता के लिए कैम्प लगाए दिखे।…

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कृषिक्षेत्र में कॉरपोरेट की घुसपैठ । Pro. H.R.ISRAN

किसान संगठनों एवं कुछ विपक्षी दलों के तमाम विरोध को अनसुना और दरकिनार करते हुए सरकार ने इन बिलों को बिना किसी संशोधन के संसद से पारित करवा लिया है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही ये कानून बनने वाले हैं। 13 सितम्बर को एक आलेख पोस्ट किया था, जिसमेंकृषि सुधार से जुड़े इन अध्यादेशों से किसानों के लिए क्या खतरे उत्पन्न होने वाले हैं, इनको उजागर किया था। उसी की निरंतरता में पुनः स्पष्ट कर रहा हूँ कि ये तीनों बिल पूरी तरह बड़े व्यापारियों और कंपनियों के…

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कृषि अध्यादेशों से आगे क्या ? Mahak Singh Tarar

  महक सिंह तरार सरकार खेती सुधार के लिए जो 3 अध्यादेश लायी थी वो अब कानूनी जामा पहनकर किसानों की नियति निर्धारित करने को अग्रसर हैं। पिछले दशक मे MSP को बढ़ाने के लिए आंदोलन होते थे आज नौबत ये है कि बस MSP बच जाए। किसान हितैषी थिंक टैंक Ramandeep Singh Mann , सरदार V M सिंह, देवेंदर शर्मा इत्यादि एक साल पहले किसानों को 18000 हजार रुपये महीने की मिनिमम गारन्टिड इनकम पर विमर्श चला रहे थे। पर आज सरकारी दांव के सामने कोशिश कर रहे हैं…

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सरकारी सौजन्य से सरकारी ख़ज़ाने की लूट-खसोट

प्रोफेसर हनुमाना राम ईसराण (पूर्व प्राचार्य ,कॉलेज शिक्षा ,राजस्थान)   ” All that glitters is not gold.” चमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती। यह कथन शेक्सपियर का है।जिन लोकलुभावन योजनाओं का सरकार बड़े धूम- धड़ाके से प्रचार- प्रसार कर रही है, उनमें से अधिकांश तो निजी कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों को चोर दरवाज़े से फ़ायदा पहुंचाने के मक़सद से लॉन्च की गईं हैं। करदाताओं द्वारा चुकाई गई धनराशि बीमा कंपनियों को लुटाकर सरकार वाह-वाही लूट रही है। ‘पहली बार, पहली बार’ का झुनझुना बजाकर लुटेरों से देश और आमजन…

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भूमि अधिग्रहण कानून के साथ खिलवाड़।

प्रोफेसर हनुमाना राम ईसराण(पूर्व प्राचार्य, कॉलेज शिक्षा, राजस्थान) किसान के लिए जमीन लाइफ लाइन रही है। पीढ़ियों के खून-पसीने से उसने खेत-खलिहान पर हक हासिल किया है। जानलेवा थपेड़े सहने के बावज़ूद किसान के स्वाभिमान को क़ायम रखने में उसकी जमीन ने अहम भूमिका निभाई है। किसान को उत्पादनकर्ता की बजाय चाकर-दास की श्रेणी में धकेलने की एक सुविचारित साजिश अब परवान पर है। कैसे? यह समझने के लिए इस आलेख को गौर से पढ़िए। कॉरपोरेट घरानों की गोदी सरकार अपने आकाओं अर्थात उद्योगपतियों का वरद हस्त प्राप्त करने में…

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कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन अध्यादेश और उनका किसानों पर प्रभाव ।

  प्रोफेसर हनुमानाराम ईसराण (पूर्व प्राचार्य ,कॉलेज शिक्षा राजस्थान) केंद्र सरकार ने 5 जून, 2020 को एक पुराने कानून (आवश्यक वस्तु अधिनियम EC Act 1955) में संशोधन सहित दो नए कानूनों “द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स प्रमोशन एंड फेसिलिएशन FPTC 2020)” और “फार्मर एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्युरेंस एंड फार्म सर्विसेज आर्डिनेंस FAPAFS 2020)” को अध्यादेश के जरिए लागू किया है। किसानों को गुमराह करने के लिए कहा गया कि इससे किसानों को उनकी उपज के सही दाम मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी। यह सिर्फ…

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मिथ्या गर्व के वशीभूत जमीनी मुद्दों को भूलते जा रहे हैं हम । Vikash Anand

विकाश आनंद अपने ही ज़मीन पर बंधुआ मज़दूर होना और तिस पर अपने हिन्दू होने का गर्व, कभी हिंदी बोलने वाले होने पर गर्व तो कभी कुछ और होने में गर्व। डायरेक्ट ब्रिटिश राज और परोक्ष ब्रिटिश शासन में अंतर यह आया है कि पहले लोग अपने हित-अनहित को जान समझ रहे थे और उसी अनुरूप प्रतिक्रिया कर रहे थे। लेकिन आज़ाद भारत की ग़ुलाम सरकारों ने अपने बुद्धिजीवियों को जनता के बुद्धिजीवियों के रूप में जिस तरह से इंजेक्ट किया है, वह प्राणघातक बन गया है। इसकी पहली और…

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किसान नहीं पूंजीपति हितैषी है कृषि अध्यादेश – Hawasingh Sangwan

पूर्व कमाडेंट हवासिंह सांगवानमो.न० 94160 56145 हाल ही में सरकार तीन नए कृषि अध्यादेश लेकर आई है । इनमें जो सबसे पहली अहम् बात है वह यह है कि पहले हर व्यापारी केवल मंडी से ही फसल खरीद सकता था परन्तु अब व्यापारी को इन नए अध्यादेश के तहत मंडी के बाहर से फसल खरीदने की छूट दी गई है । कहने का अर्थ है कि सर छोटूराम ने किसान के हित के लिए सन 1938 में “ पंजाब कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम -1938” बनाया था उसे यह सरकार एक…

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प्रशांत भूषण केस और कोलेजियम सिस्टम पर उठी पहली बुलंद आवाज उपेंद्र कुशवाहा।

मौर्यवंशी शशिकांत मेहता आज सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक फैसला आया । ऐतिहासिक फैसला इस मायने में और भी हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की आलोचना करने पर सुप्रीम कोर्ट जजेज जाने-माने वकील प्रशांत भूषण को अवमानना करने के जुर्म में एक कठोर फैसला सुना कर आम जनता में यह संदेश देने की कोशिश में थे । उद्देश्य था लोकतंत्र में कोलेजियम सिस्टम से चुने गए जजेज द्वारा एक नागरिक के तौर पर जनता के दिए गए आलोचना के अधिकार पर एक तरह से खत्म करना…

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