रामस्वरूप वर्मा : एक नेता जिसके लिए अपने सिद्धांत ही सब कुछ थे।

विकाश आंनद हमें किस्सों में किसी काल्पनिक चाणक्य की कहानी सुनाई जाती है कि वह सरकारी काम और अपने निजी काम के लिए अलग-अलग आवास और दिया रखते थे। पर उत्तर प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और मानवतावादी दार्शनिक रामस्वरूप वर्मा जी वास्तव में वित्त मंत्री रहते हुए भी अपने काम से कहीं भी आने-जाने के लिए रिक्शा या टैम्पू या रेलगाड़ी का ही प्रयोग करते थे। आज उनकी जयंती है। भाग्य-भगवान, अन्धविश्वास, ढोंग-पोंग-पाखंड, पुनर्जन्म, पूर्वजन्म, जात-विवाद, चमत्कार, बाबा-बूबी, मठ-मंदिर, चिलम-चिमटा, जैसी व्यर्थ की कुरीतियों और परम्पराओं के ख़िलाफ़ ऐसी…

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नई शिक्षा निति की सार्थकता एवं दुष्प्रभाव

सरकार नई शिक्षा नीति NEP (New Education Policy) लेकर आयी है। इसके तहत प्राथमिक से 12वीं तक की शिक्षा का एकीकरण (Universalization) किया जायेगा अर्थात समान शिक्षा । शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की आवश्यकता तो है लेकिन क्या ये कदम सही दिशा में है ? सिर्फ कोर्स बदलने से मोदी जी के “access, equity, quality, affordability and accountability” मिशन की प्राप्ति हो जाएगी क्या ? अकेले यूपी में करीब 3, 00, 000 शिक्षकों के पद रिक्त हैं । योगी सरकार आने के पश्चात करीब 1 लाख प्रधानाध्यापकों के पद खत्म…

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हर परिवार चुने अपना फैमिली फार्मर ।- अनुज राज पाठक

अनुज राज पाठक। आज चहुँ ओर एक हाहाकार है। रोटी चर्चा के केंद्र में आ गई है। मज़दूरों के दर्द पर टीवी चैनल चीख रहे हैं। हमें थोड़ा-सा सोचना चाहिए कि हम कितने बरस बाद रोटी और मज़दूरों पर बात कर रहे हैं। असल में व्यक्ति तब तक वास्तविक दर्द महसूस नहीं कर सकता, जब तक वह ख़ुद उस दर्द में न हो या उसका कोई आत्मीय जन दर्द में न हो।हम चीख सकते हैं। किसानों की दुर्दशा पर चिल्ला सकते हैं। लेकिन यह चीखना-चिल्लाना बड़ा ही नाटकीय होता है।…

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अफसर ऐसे भी होते हैं -Hawasingh Sangwan

  हवासिंह सांगवान , पूर्व कमाडेंट , सीआरपीएफमो०न० 94160 56145 मैं अभी जिस अफसर की बात करने जा रहा हूँ उनको मैंने नजदीक से देखा और सुना है । उन अफसर के बारे में मैं कुछ किस्से लिख रहा हूँ आप इनको पढ़कर खुद ही आकलन करें कि ये अफसर कैसे थे ? ये सन 1981 की बात हैं , मैं अपनी 1 बटालियन (सीआरपीएफ) में अरुणाचल प्रदेश के डिप्रोजा में बतौर इंस्पेक्टर तैनात था ।मेरे कमाडेंट वहां से बदली होकर आईजी दफ्तर शिलोंग में स्टाफ अफसर आ गए थे…

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जींद हरयाणा के लेखक-डायरेक्टर संजय सैनी ने बनाई कोरोना वारियर्स पर शॉर्ट फिल्म।

कर्मपाल पूनिया जिला जींद हरियाणा के लेखक और डारेक्टर संजय सैनी ने अपने साथियों मनजीत गौतम, बलजीत पुनिया और कुलदीप बिरोली के साथ बिना ज्यादा संसाधनों के किसानों की कोरोना महामारी को दर्शाती शॉर्ट फिल्म बनाकर जिला प्रशासन को दी है । जिसमें जिले के हर अधिकारी से लेकर कर्मचारी को कोरोना वारियर्स बताया गया है ।फिल्म दो जून शाम आठ बजे जनमत हरियाणा के यूट्यूब चैनल पर रिलीज की गई ,फिल्म का विमोचन जिला जींद के अस्पताल के मुख्य चिकित्सक श्री जयभगवान जाटान जी ने किया ।फ़िल्म की शुरुआत…

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वर्ण व्यवस्था प्राचीन नही आधुनिक है।

        डॉ.मुकेश मीणा आंशिक रूप से इंडिया में वर्ण विभाजन हुआ ,लेकिन प्राचीन काल में नही आधुनिक काल में अन्ग्रेजो के द्वारा । इसके क्या कारण थे इसे समझते हैं ।अंग्रेजो का लेबर मैनेजमेंट बहुत अच्छा था उसमें आधुनिक सिद्धान्तों का समावेश था जो उनसे पहले इंडिया में कही भी नही दिखाई देता । अग्रेजो की प्रशासनिक प्रणाली पूर्णतया औपचारिक नियमो पर आधारित थी । अंग्रेजों ने अपने कर्मचारियों के लिए ऐसे नियम बना रखे थे कि वे स्थानीय लोगो से घुल मिल ना सकें, जिससे उनके…

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BAMCEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम और उनकी टीम चंदे के गबन के खेल में है शामिल-VIKAS TELI

विकास तेली  Ex पूर्णकालिक प्रचारक (BAMCEF) मैं BAMCEF के पूर्ण कालीन प्रचारक के रूप में आगरा मण्डल का 1 साल प्रभारी रहा, उससे पहले BMM का फ़िरोज़ाबाद जिला अध्यक्ष था। आगरा मण्डल में चार जिले आते हैं, आगरा,मथुरा,फिरोजाबाद और मैनपुरी, जिसमें आगरा, मथुरा में ही टीम थी, मैनपुरी में कोई टीम नहीं थी।इनमें से सबसे ज्यादा फंड आगरा-मथुरा से आता था, उसके बाद फिरोजबाद का नम्बर था। मुझे जब आगरा मण्डल का प्रभारी बनाया गया तो सारे फंड देने वालों का डाटा मेरे पास आया, जब मैं फील्ड में घूमा…

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इतिहास के दुकानदार और किसान इतिहास

   विकाश आनन्द। इतिहास के दुकानदारों की दुकानदारी देखिये कि कितना जतन करके किसानों के इतिहास को चर्चा से ही गायब कर दिया गया है। जिस मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को तराइन के दूसरे युद्ध में पराजित किया, मार्च 1205 में उसी गौरी का सर खोखर जाटों ने रामलाल खोखर के नेतृत्व में काट दिया था। इसके बावजूद इतिहास की दुकान से उनका नाम गायब है। सोमनाथ मंदिर लूटकर जा रहे महमूद गजनवी को नागौर में खोखरों ने लूट लिया। लेकिन इतिहास लिखने वालों ने इसे भी दर्ज़ करने…

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UNDERSTANDING MARX- PART III RICHARD D WOLFF के यूट्युब वीडियो का हिंदी अनुवाद

मैं आपको समझाने की कोशिश करता हूँ कि किसी भी आबादी (चाहे वो छोटा सा गांव हो, शहर हो स्टेट हो या देश हो) के लिये मार्क्सवादी नजरिया कैसे काम करता है। वो क्या बात है जो मार्क्स बताना चाहता था। हम वो देखने की कोशिश करते हैं जो बाकी सब देखने में नाकाम रहते हैं। इंसानो का हर समुदाय, समाज, कम्युनिटी एक व्यवस्था के तहत काम करता है। ये सम्भव है कि लोगों को उस व्यवस्था के बारे मे न पता हो पर वो सब व्यवस्था के अधीन ही…

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वर्णवाद के अस्तित्व का फर्जी आधार।

डॉ.मुकेश कुमार मीणा। यह सब जानते है कि इंडिया में वैदिक साहित्य को ट्रांसलेट करके आर्य थ्योरी का रूप देने वाले अंग्रेज थे और उनके द्वारा ट्रांसलेटेड वैदिक साहित्य के आधार पर ही वर्ण व्यवस्था का प्रचार और स्थापना हुयी । साहित्य के ट्रांसलेशन के बाद प्रसार का कार्य उन्होंने अपने पालतू समाज सुधारको से सुधार के नाम पर करवाया। इन समाज सुधारको के द्वारा सुधार के नाम पर ऐसे ट्रांसलेटेड साहित्य को स्थापित किया जो मूल रूप से इंडियन उप महाद्वीप का नहीं था या केवल छोटे से शरणार्थी…

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