रिलायंस नवल का कबाड़ी कम्पनी से भारत का सबसे बड़े डिफेंस उत्पादक बनने की कहानी।

 

Lakshmipratap Singh

गुजरात में 1997 में पुराने जर्जर समुद्री जहाजों को तोड़ के कबाड़ का धंधा करने के लिए “पीपावाव शिप डिस्मैंटलिंग एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड” नामकी एक कंपनी बनी। इधर मार्च 1998 गुजरात में भाजपा की सरकार आयी, उधर नयी बनी कम्पनी को “गुजरात पिपाव पोर्ट लिमिटेड” का शिप तोड़ने का काम मिल गया। सन 2001 में आडवाणी की सिफारिश पर अटल जी ने केशुभाई पटेल को हटा कर मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया। अगले साल चुनाव से पहले गोधरा का साबरमती कांड हुआ जिसके बाद मोदी जी जीत गए ..

2007 चुनाव और कबाड़ी से जहाज निर्माता तक :
सन 2005 में कबाड़ी कंपनी ने कागजों में अपना धंधा कबाड़ से बदल कर शिप बिल्डिंग और रिपेयर कर लिया। लेकिन कम्पनी के पास न तो बनाने का कोई अनुभव था न कोई रिसर्च डेवलपमेंट यूनिट इस लिए सन 2006 में SembCorp नामकी एक सिंगापुर की संस्था से एग्रीमेंट किया ताकि टेक्नीकल सपोर्ट मिल जाये। 2006 में ही डेवलपमेंट कमिश्नर से एक 100% निर्यात आधारित इकाई स्थापित करने की स्वीकृति मिल गयी लेकिन जो धंधा है उसकी इन्हें कोई जानकारी नहीं इस लिए 2006 में KOMAC से शिप बनाने की बेसिक जानकारी का एग्रीमेंट हुआ …

यहाँ तक कम्पनी के पास किसी भी तरह की जहाज बनाने की सामर्थ्य छोड़िये टेक्नीकल सपोर्ट तक नहीं था। आप सोचेंगे की जिस कबाड़ खरीदने वाली कंपनी के पास जहाज बनाने की न कोई टेक्नोलॉजी है न टीम उसमें अचानक अरबों रूपये का निवेश भी आ गया और ऑर्डर भी तो कैसे ? आपको बता दूँ मॉरीसस और सिंगापुर से भारत में ब्लेक मनी पार्क होती थी क्योंकि भारत का कानून वहां की इन्वेस्टमेंट कंपनी का डिटेल मांगता था लेकिन आखिर उसमें पैसा किस इन्वेस्टर ने लगाया उसका डिटेल नहीं मांगता था। गुजरात में अगले साल चुनाव थे और इस कंपनी में मॉरीसस से पैसा बरस रहा था। अगले साल चुनाव को द्देखते हुए जो इन्वेस्टमेंट आया व् ऑर्डर आये वो समझिये :

१) September 2006 मौरीसस के वेंचर केपिटलिस्ट 2i Capital पीसीसी
२.) September 2006 Exim बैंक
३.) October 2006 Metdist Industries Holdings लिमिटेड
४.) November 2006 कंपनी को Golden Ocean Group Limited, से 2 पेनामेक्स कॅरियर का ऑर्डर मिल गया
५.) December 2006 में कम्पनी को SETAF S.A.S. France, से ऑर्डर मिल गया …
६.) December 2006 AVGI Maritime Services S.A. ने 4 पेनामेक्स शिप का ऑर्डर दे दिया

उस समय मॉरीशस और सिंगापुर से आने वाला ज्यादातर इन्वेस्टमेंट कला धन था। पहले कितना पैसा इस कंपनी में मॉरीशस के रास्ते आया वो देखिये उसके बाद एक महत्वपूर्ण बात बताता हूँ:

७) February 2007 2i Capital पीसीसी द्वारा कन्वर्टिबल बांड
८) March 2007 Private equity investment by ट्रिनिटी कैपिटल (नाइन) लिमिटेड, मॉरिशस बेस्ड इन्वेस्टर.
९) March 2007 Private equity investment by न्यू यॉर्क लाइफ इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट फण्ड (FVCI) II, LLC, (मॉरिशस बेस्ड)
१०) May 2007 Unit Trust of इंडिया
११) September 2007 पुंज लॉयड ग्रुप इस कम्पनी में निवेश करके इस का प्रमोटर बन गया
१२) September 2007 Private equity investment बी सिटाडेल इक्विटी फण्ड लिमिटेड (जो बाद में ABN अमरो को ट्रांसफर हुआ)
१३) September 2007 : 2i Capital PCC को Equity Shares आलोट किये गए
१४.) November 2007 IDBI, IL&FS Trust Company trust, SembCorp and The India Fund Inc. द्वारा इक्विटी शेयर में पैसा लगाया गया. जिसमें से IL &FS और IDBI दोनों में भयंकर घोटाले व् फ्रॉड निकले हैं CBI जाँच जारी है
१५.) December 2007 The Asia Opportunities Offshore Markets Fund Limited ने इक्विटी शेयर में पैसा लगाया जो एक Blackstone Group fund है)

फ़रवरी 2008 में इस कम्पनी को अपने पहले 4 जहाज बनाने के लिए स्टील कटिंग की परमिशन मिलती है मतलब इससे पहले कम्पनी के पास शिप बनाने के सबसे जरुरी अप्रूवल ही नहीं थे फिर वो मॉरीशस में बैठे कौन से गधे थे जो अरबों का निवेश कर रहे थे ? जिस कम्पनी के पास उत्पादन के लिए रॉ जरुरी मेटेरियल मुहैया करने का लाइसेंस 2008 में मिल रहा है उसमें लोगों ने पैसा 2006 में ही लगाना शुरू कर दिया और उत्पाद का ऑर्डर भी 2006 में ही मिलने शुरू हो गए। तो ये कमाल मोदी जी की मुख्यमंत्री रहते विदेशी उधोगपतियों से मुलाकात का है। रिलायंस ने अपना पहला कमर्शियल प्रोडक्शन अप्रैल 2009 में शुरू किया लेकिन उससे पहले ही IDBI और IF&LS इसमें मोती रकम निवेश कर चुका था।

दर असल ये एक सेल कम्पनी थी जिसके अम्ब्रेल्ला के अंदर कई कंपनियां खोली गयी जिसमें विदेशों से कला धन आया। जिसे चुनाव में प्रयोग किया गया । यही कारन था की कबाड़ खरीदने से जहाज बनाने का परमिशन मोदी जी के राज में मिला और बिना स्टील कटिंग की परमिशन के ही इसे ऑर्डर मिल गए। रिलायंस को राफेल का 35 हज़ार करोड़ कॉन्ट्रेक्ट भी मिला जबकि इस कम्पनी ने ONGC से लेकर भारतीय जल सेना (नेवी) किसी के भी ऑर्डर कम्प्लीट नहीं किये।
सन 2008 में ONGC ने समुद्र के अंदर तेल लाने-ले जाने के लिए 12 वेसल (शिप) का टेंडर निकाला। अनिल अम्बानी की कबाड़ खरीदने वाली पीपावाव शिप डिसमेंटलिंग कम्पनी को अब शिपबिल्डिंग कम्पनी बना लिया गया था। हालाँकि अभी भी स्टील कटिंग का परमिशन नहीं लिया गया था लेकिन ONGC को 105 करोड़ में 12 शिप डिलीवर करने का टेंडर ले लिया। “पहले मेहमान बुला के घर बिठा लिए फिर दावत के लिए आटा-घी खरीदने” वाली कहावत की तर्ज पर टेंडर के बाद रॉ मेटेरियल के परमिशन आये। अब दिक्कत आयी शिप के टेक्नीकल मानकों पे खरा उतरने की तो उसके लिए सिंगापुर की “जुरोंग शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड” से एक एग्रीमेंट कर लिया की बस टेक्नीकल राउंड पास करवा देना वेसल का। ONGC ने स्ट्रिक्टली कहा की सिंगापूर की टेक्नीकल कम्पनी को इसमें समायोजित रखा जाये ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न आये।

पीपावाव शिपबिल्डिंग से रिलायंस डिफेन्स और रिलायंस नवल बनती रही लेकिन ONGC को वेसेल डिलीवर नहीं हुये। सरकारी उपक्रम होने की वजह से उतने बड़े ऑर्डर की सिक्योरिटी के रूप में रिलायंस ने 45 करोड़ रूपये की बैंक गारंटी रखी थी। समय सीमा ख़त्म होने पर ONGC ने बैंक गारंटी और अपना पेमेंट रख लिया। टेंडर के 10 साल बाद 2018 में आनन्-फानन में रिलायंस नवल ने 8 शिप को ONGC को देने की तयारी की लेकिन ONGC ने डिलीवरी लेने से मना कर दिया।

अनिल अम्बानी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो ONGC का कहना था की, जुरोंग शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड के साथ रिलायंस नवल का करार ख़त्म हो गया है, फिर टेक्नीकल मानक किस तरह पुरे हुए और उनकी क्या गुणवत्ता है ? रिलायंस के पास अपना कोई शिप बनाने का अनुभव नहीं है, यदि 4 साल बाद कोई टेक्नीकल फेल्यर होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी ? रिलायंस ने सारी तकनीक और विधियों के लिए किसी न किसी कम्पनी या संस्था से करार किया था जिससे शिप तो बना लिए लेकिन शिप बनाने में अनुभवी “जुरोंग शिपयार्ड” जैसी कम्पनी के सहयोग के बिना कल मैंटीनैंस और रिपेयर कैसे करेगा ?
सबसे मजे की बात ये हैं की इसी कम्पनी को आगे चलकर राफेल के मेंटिनेंस का 35 हज़ार करोड़ का कॉन्ट्रेक्ट मिला इस विषय पर रिपोर्टिंग जारी रहेगी।

(लेखक शोशल मीडिया का चर्चित चेहरा हैं ।राजनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक मुद्दों पर बेहतरीन विश्लेषण और बेबाक लेखनी के लिए जाने जाते हैं।)

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