Avinash Kakde
आतंकी एक दिन मे पैदा नहीं होते इन्सान को हैवान बनाने की प्रक्रिया बहुत जटिल और लंबी है ।
सब से पहले उसे इंसान बनने से रोक कर हिंदू , मुस्लिम , ईसाई बनाना पडता है फिर उनमें नफरत पैदा करनी होती है जिस के कारण वह आकाओ के विचारों के प्रति कट्टर समर्थक हो जाए।व्यक्ति को कट्टर और आतंकी विचारो से भरने के लिये उस व्यक्ति को.निम्नलिखित प्रक्रियो से गुजारना होता हैं ।:-
दुनिया का सबसे बडा आतंकी हमला अमेरिकन ट्विन टॉवर का माना जाता है। उसमे भी निम्नलिखित बातो को शांति प्रिय तरीके से समझा कर ही हमला करने के लिए जिहादीओ को प्रेरीत किया गया था ।खुद की जान न्यौछावर करने के लिए किसी भी पायलट के कनपटी पर बंदूक नहीं रखी थी , या उसके परिवार को अगवा कर , उसे भय दिखाकर उससे यह काम कारवाया नहीं गया , यह बात हम जानते है ।
किसी भी बच्चे को आतंकवादी बनाने के लिए निम्न लिखित बातों को समझाया जाता है :-
१) अपने पक्ष मे सच्चे , झूठे इतिहास का बखान करते रहना ।
२) इतिहास मे हमारे जाती, धर्म , भाषा ,वर्ण और गौरवशाली पवित्र ग्रंथ को बढा चढाकर वर्णित करते रहना और अपने धर्म, जाती ,वर्ण के उच्चस्थान का अतिशयोक्ति पूर्ण विवेचन करते रहना ।
३) इतिहास मे हमारी कौम का अतिशयोक्ति पुर्ण पराक्रम या उत्पीडन की कथाओं का बखान करते रहना ।
४) हमारी विरासत मतलब हम किनके वंशज है वह कितने पराक्रमी थे आक्रमणकारियों उनसे उनका सन्मान, राजपाट कैसे छल बल से छीन लिया चाहे वह हमारे आपसी लडाई और नादानी से छिना गया होगा मगर दोष हमे दुसरे को देना है और उनके विषय की घृणा को युवाओ के दिमाग मे कूटकूट कर भरते रहना है।
५) हमारे जाती धर्म भाषा प्रांत के ऐतिहासिक आदर्श पुरुष , महापुरुष , आराध्य को खोजना और उनके तथाकथित पराक्रम का बखान करते रहना ।
६) आराध्य , महापुरुष , ऐतिहासिक पुरूष और पवित्र किताबो से हमारा संबंध जोडते रहना ।
७) उनके तत्कालिक विरोधियों के नाम , जाती , वंश , धर्म ढुंढना और उनकी बुराई करना ।
८) आराध्य , महापुरुष , आदर्श पुरुष और पवित्र किताब के विरोध करनेवालो के वर्तमान वंशज ढुंडना और उनके प्रति नफरत पैदा करना ।
९) भूतकाल में विरोध करनेवालो के वर्तमान वंशजो का वर्तमान समय में काल्पनिक भय निर्माण करना , झूठ मूठ के आंकडे , कथा , कहानियां निर्माण करना और उसे समाज में प्रभावी ढंग से प्रचारित, प्रसारित करते रहना ।
१०) हमारे आदर्श पुरुष , महापुरुष ,आराध्य और पवित्र किताब के अस्तित्व को वर्तमान व्यवस्था से वर्तमान शासन से , प्रशासनसे और जाती समुदाय से कल्पित खतरे का निरंतर आभास कराते रहना ।
११) भविष्य मे अन्य जाती, धर्म , भाषिक लोगो की ओर से आनेवाले काल्पनिक खतरे से निपटने के लिये हमारी जाती , धर्म , भाषा , नस्ल को शस्त्र धारण करने के लिए , पराक्रम दिखाने के लिए उकसाते रहना ।
१२) हमारी वर्तमान समस्या में हमारे काल्पनिक विरोधियों का तथाकथित रोल बताना , उनके प्रति नफरत पैदा करना ।
वर्तमान की समस्याओं का ठीकरा भूतकालीन नेता , महापुरुष , आदर्श पुरुष , आराध्य या धार्मिक नेताओं , उनकी धारनाओं , योजनाओं पर फोडना और उनके विरोध में भ्रामक और आक्रमक प्रचार, प्रसार करना ।
१३) काल्पनिक विरोधियों के सामाजिक ,आर्थिक , सांस्कृतिक बहिष्कार की योजना बनाना और उसका आक्रामक प्रचार प्रसार करते रहना।
१४) सारे प्रचार, प्रसार के माध्यमो से काल्पनिक भय निर्मीत करते रहना और हमारी वर्तमान समस्याओं के लिये दुसरे धर्म, भाषा , जाती , प्रदेश के लोगो और पवित्र किताबों को जिम्मेदार ठहराना और उनके प्रती नफरत पैदा करते रहना ।
१५) काल्पनिक भय से निपटने के लिये आपके हाथो मे शस्त्र उठाने की जरूरत को समझाना ।
आपके कमसिन बच्चो में झूठ मूठ का पराक्रम भरना उन्हे धर्म , जाती का रक्षक बनने के लिये प्रेरित करना और उनके माध्यम से मनचाहा कार्य करवाना ।
१६) काल्पनिक विनाश का भय समाप्त करने के लिये पराक्रमी स्वप्न रंजन करना और धार्मिक, भाषिक , जातिगत उन्माद पैदा करनेवाले नफरती आकाओ के प्रति मंदबुद्धी और भावनांध फौज खडी करना ।
१७) आपकी स्वप्नपुर्ती के लिये और भूतकालिन पीड़ा से मुक्ति के लिये वर्तमान मे हिंसक उपाय आपके बच्चो के दिल और दिमाग मे भरते रहना ।
१८) समाज मे वर्तमान मे रहनेवाले कल्पित दुश्मनो की समाप्ती के बिना आपका उद्धार असंभव है यह विचार युवाओ के मन में भरते रहना।
१८A) अपने सभी रिश्ते, नातो को तिलांजली देकर धर्म,जाती , किताब कल्पित दुश्मनो से बचाने के लिये और उनसे पुराने कर्मो का बदला लेने के लिये और अपने वर्तमान के सब संबध विच्छेद करने के लिये प्रोत्साहित करते रहना ।
१९) नफरती साहित्य का चयन करना और दुश्मनो को समाप्त करने के लिये शस्त्रो का चयन कर शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण देते रहना ।
२०) कल्पित दुश्मनो से लडने के लिये शस्त्रो की उपलब्धता कराना।
२१) आपके तथाकथित दुश्मन समाप्त होने पर आपका भविष्य कैसे स्वर्णिम होगा इसका सपना दिखाते रहना , स्वप्नरंजन मे भ्रमित युवाओ मशगूल रखना ।
२२) आपका आराध्य महापुरुष , आदर्श पुरुष , पवित्र ग्रंथ किस तरह खतरे में पड़ गया है और उसे बचाना ही आपके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है यह समझाकर जिहाद , विद्रोह या ऐल्गार की शूरूआत करवाना ।
२३) इसके बाद शुरू होता है अफगानी , सिरीयाई सर्व विनाश जिसमें आपके बच्चे बली चढते हैं और नफरत पैदा करनेवाले दूर बैठकर निर्देश देते है तमाशा देखते है ।
२४) सब कुछ बर्बाद होने के बाद अगर आप और आपकी विचार शक्ति जिंदा रही तो आपका झूठे स्वप्नो से भ्रम नीरस होगा मगर उस वक्त समय निकल गया होगा और परिस्थिती इतनी बिगड़ गई होगी की आपको स्थिती सुधारने के लिये अनेको साल लग जाएं और तब तक नफरत पैदा करनेवालो की संताने आपको गुलाम बनाकर राज करेंगे और आपकी औलादे आपकी नादानी का भुगतान करेंगी ।
२५) अब आप क्या चाहते हो भ्रामक स्वप्न , काल्पनिक भय दिखाने वालो का खात्मा या पूर्णकालिक गुलामी ?
यह बात मैने अफगानिस्तान, सिरीया की बताई मगर आप आपके आसपास खोजिये कहुं आपके बच्चे भी नफरती आत्मा बनकर रात दिन नफरत फैलानेवाली बाते तो नहीं करते ? उनका जिंदगी के सच से सामना करवाइये , स्वप्नरंजन से बाहर निकालिये वर्ना आप , आपका परिवार और देश धार्मिक शासन में फंसेगा ,आपके सारे लोकतान्त्रिक अधिकार धर्ममार्तंडो के हाथो मे कैद होंगे और आपकी अनेक पुश्तें इसका भुगतान करेंगी ।
हम क्या चाहते है ??
काल्पनिक स्वप्नपूर्ति या आजादी और वर्तमान समस्याओ से मुक्ति ?
फैसला आपका होगा तो भविष्य भी आपका होगा ??
लेखक:
अविनाश काकडे , नागपूर
+919422147040
