सैद्धान्तिक लोकतंत्र बनाम वास्तविक लोकतंत्र।

डॉ.मुकेश कुमार मीणा।अगर लोकत्रंत वास्तविक है तो कोई संस्था या नियम आपदा के समय देश के किसी भाग में फंसे लोगो की मदद करने से दूसरी संस्था या लोगो को नही रोक सकता है ,उसका मापन उसके कार्यो से ही होगा । लेकिन यदी लोकतन्त्र केवल सैद्धान्तिक है तो साधन होने के बाद भी उपयुक्त लोगो तक सहायता पहुंचे यह जरुरी नही है ।सहायता नियमो और कानूनों में फँस कर रह जायेगी । आइये इण्डिया के लोकतंत्र का इस आधार पर मूल्यांकन करते हैं:- इंडिया के संविधान में केंद्र राज्य…

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