मौर्यवंशी शशिकांत मेहता। 15 अप्रैल 1983 में पटना से अपने माँ के नाम भेजे पत्र में चंदू ने लिखा था शायद तुम भी किसी दिन गोर्की(Gorky’s novel )के उपन्यास माँ की करेक्टर बनो और मैं तुम्हारा बेटा उसका नायक जो कभी सड़ी हुई व्यवस्था से कभी समझौता नही करता! लाल सलाम! चंद्रशेखर प्रसाद कुशवाहा उर्फ़ चंदू के हत्या के बाद नई पीढ़ी ने चंदू के माँ को गोर्की के माँ में बदलते हुए सब ने देखा है और देखा माँ की दुःख के सागर को प्रतिशोध के जवाला में…
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