विकाश आंनद हमें किस्सों में किसी काल्पनिक चाणक्य की कहानी सुनाई जाती है कि वह सरकारी काम और अपने निजी काम के लिए अलग-अलग आवास और दिया रखते थे। पर उत्तर प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और मानवतावादी दार्शनिक रामस्वरूप वर्मा जी वास्तव में वित्त मंत्री रहते हुए भी अपने काम से कहीं भी आने-जाने के लिए रिक्शा या टैम्पू या रेलगाड़ी का ही प्रयोग करते थे। आज उनकी जयंती है। भाग्य-भगवान, अन्धविश्वास, ढोंग-पोंग-पाखंड, पुनर्जन्म, पूर्वजन्म, जात-विवाद, चमत्कार, बाबा-बूबी, मठ-मंदिर, चिलम-चिमटा, जैसी व्यर्थ की कुरीतियों और परम्पराओं के ख़िलाफ़ ऐसी…
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